कृतयुग की विशेषता  


कृतयुग जब प्रकट होता है तो इसकी एक अन्य विशेषता भी है जिसके द्वारा बाह्य धर्मों का असत्य, सत्तारूढ़ लोगों के देश-विरोध एवं बेईमानी की स्वतः ही पोल जाती है. झूठ-मुठ के सभी पैगम्बर एवं पंथ -प्रमुखों की पोल खुल जायेगी तथा परमात्मा के नाम पर घृणा एवं असत्य फैलाने वाली संस्थाओं का कृतयुग में भंडाफोड़ हो जाएगा, क्योंकि इस काल में सत्य स्वतः प्रकट हो जाता है। सभी भ्रष्ट उद्यमी तथा झूठें गुरुओं का पर्दाफाश हो जाएगा।

कृतयुग में कष्ट भुगतने के लिए बहुत कुछ हो सकता है। यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है, परन्तु यह हमारे अपने ही कर्मों का फल है जिसको हमें भुगतना होगा। यदि लोग योगवर्णित आत्मावस्था या परमेश्वरी शक्ति से एकाकारिता प्राप्त कर लें तो निःसंदेह इन कष्टों से
बचा जा सकता है। पूर्ण आध्यात्मिकता का मार्ग ही मानव के लिए एकमात्र सुख-प्रदायक मार्ग है इसे स्वीकार किए बिना कृतयुग में पोल खुलने की यह अभिव्यक्ति तथा दूरक्रम कर्मफल के माध्यम से घटित होता ही रहेगा। सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से लोग जो कष्ट भुगतेंगे वे उनके कर्मफल के अतिरिक्त कुछ अन्य न होंगे, वर्तमान में उन्हीं की इच्छाओं का फल।

इस पक्ष के बावजूद भी वास्तविक गंभीर सत्य-साधकों के लिए कृतयुग सुखद काल है। कृतयुग में आत्मपरिवर्तन के अद्वितीय अवसर हैं। उत्थान को प्राप्त करके ये साधक अत्यन्त महान आध्यात्मिक अवस्था प्राप्त कर लेंगे।


- श्री माताजी निर्मला देवी

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1 प्रतिक्रिया: to “ कृतयुग की विशेषता

  • clpatel
    January 3, 2010 at 2:33 AM  

    कृतयुग
    कृतयुग के आगमन से, अब इतिहास बदलेंगे।
    आधुनिक प्राचिन सब, विश्वास बदलेंगे॥१॥
    परंपरायें प्राचीन अब, पीछे छूट जायेंगे।
    भेद-भाव छल-कपटके, घडे़ अब फूट जायेंगे॥२॥
    सहज सत्य के उदय से, सब अंधकार हट जायेंगे।
    सहजयोग के अभ्यास से, आत्मसाक्षात्कार पायेंगे॥३॥
    है भविष्य उज्ज्वल सामने,नव निर्माण करते जायेंगे।
    दिव्यता के प्रकाश में, आगे ही बढ़ते ही जायेंगे॥४॥
    सत्य अहिंसा प्रेम के ही, गीत अब गाये जायेंगे।
    मिट जायेंगे कलंक जीवन के,आब "कल्कि" अवतार आयेंगे॥५॥
    असत्य अधर्म अन्याय अनैतिकता के,अब अंत हो जायेंगे।
    विश्वबंधुत्व एकात्मता में, सब संत हो जायेंगे।।६॥
    मातृप्रेम में निरत रहेंगे,शुभ कर्म करते जायेंगे।
    प्रभु का साम्राज्य होगा धरा पर, सब जीवन अनंत पायेंगे॥७॥

श्री माताजी निर्मला देवी