परमात्मा का योग बहोत आवश्यक हैं  

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भूत या भविष्य के बारे में जानने की कोई आवश्यकता नहीं हैं। क्या आवश्यकता हैं? इससे क्या लाभ होता हैं? अपनी पूर्व गरिमा या पूर्व जीवन में, जो आज मूल्यहीन है, आपको किस प्रकार रूचि हो सकती है? परन्तु ये मानव की दुर्बलता है कि वह अपने व्यक्तित्व में कुछ ऐसा जोड़ना चाहता है जो अत्यन्त बनावटी, अस्तित्वहीन और मूल्यहीन है। फ़िर वह कहता हैं कि मैंने ऐसा किया, मैंने ऐसा किया, मैं ऐसा कर पाया, मुझे कभी नहीं प्राप्त हुआ।


भारत में इस आज्ञा के कारण प्रायः लोग बाईं ओर को चले जाते हैं क्योंकि वह कहते हैं परमात्मा की पूजा करो। अब यदि इन्हे परमात्मा की पूजा करनी है तो उनका योग तो परमात्मा से हैं नहीं। देखें, कि माइक्रोफ़ोन से जब मेरा योग नहीं था तो मैं आप लोगों से बात नहीं कर पाई। अतः परमात्मा से योग प्राप्त किए बिना लोग परमात्मा की पूजा करने लगते हैं! वे सभी प्रकारकी आरतियाँ करते हैं, उपवास करते हैं, आदि-आदि, और स्वयं को सताते हैं!


- परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी
(दिल्ली, भारत, ०३/०२/१९८३)


(बाईं और -> इडा नाड़ी)

इडा नाडी  



देवता : श्री महाकाली
विराट में स्थान : गंगा नदी
गुण : तमोगुण, भूतकाल, सुप्तचेतन, प्रतिअहंकार
वैज्ञानिक नाम : Left Sympathetic Nervous System
सूक्ष्म गुण : भावना, पवित्रता, अस्तित्व, आनंद, इच्छा, मांगल्य,
शरीर में स्थान : संपूर्ण बायाँ भाग

बाधा होने के कारण : आलस, अंधश्रद्धा, अंधविश्वास, अपराध की भावना, तांत्रिक मार्ग, अश्लील लेखन या वाचन करना, भूतकाल के बारे में बहोत ज्यादा सोचना, बुरी आदतें

विवरण : परमपूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने सहजयोग द्वारा यह सिद्ध किया हैं के मनुष्य के शरीर में अधिभौतिक और आध्यात्मिक क्षेत्र की बायीं ओर इच्छा शक्ति हैं। उसे 'चंद्र नाडी' भी कहते हैं। यही नाडी भूतकालीन स्मृतियों को सचेतन करती हैं और उस वजह से क्रिया करने में आसानी होती हैं। जब तक यह शक्ति कार्यरत रहती हैं तब तक मनुष्य में जीवन जीने की अभिलाषा रहती हैं। इस नाडी के वजह से ही भावनाएं जागृत होती हैं और मस्तिष्क के दायीं ओर प्रतिअहंकार निर्माण होता हैं। व्यापक अर्थ में यह नाडी जीवात्मा का प्रतिक हैं।


श्री माताजी निर्मला देवी